जहां थमी थी दिव्यांग मासूम की चाल, वहां कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने थामा हाथ, 24 घंटे में प्रवीण को मिली व्हीलचेयर-ट्राइसाइकिल
एक वीडियो, मंत्री का संज्ञान और घंटों में समाधान, दिव्यांग प्रवीण की राह हुई आसान

➡️मासूम के सपनों को मंत्री केदार कश्यप की पहल से मिली उड़ान
➡️मंत्री केदार कश्यप की संवेदनशील पहल से मुस्कुराया मासूम, परिवार ने जताया आभार
➡️प्रवीण जैसे बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना साय सरकार की जिम्मेदारी, हर संभव सहायता के लिए सदैव तत्पर रहेंगे – केदार कश्यप
जगदलपुर = कभी हाथों के सहारे रेंगकर चलने वाला मासूम प्रवीण नूरेटी आज मुस्कुरा रहा है… क्योंकि उसके सपनों को पंख मिल गए हैं। वायरल हुए एक भावुक वीडियो ने पूरे प्रदेश का ध्यान खींचा और छत्तीसगढ़ शासन के वनमंत्री एवं नारायणपुर विधायक केदार कश्यप ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए मानवता की मिसाल पेश की।
सोनपुर बांधपारा निवासी प्रवीण नूरेटी (पिता राजेंद्र नूरेटी) जन्म से ही दिव्यांग है और चलने में असमर्थ है। पहली कक्षा में पढ़ने वाला यह बच्चा अपने दोस्तों के साथ बाजार देखने जाने की इच्छा रखता था, लेकिन शारीरिक असमर्थता उसके सपनों के बीच दीवार बन गई थी। जब उसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, तो लोगों की आंखें नम हो गईं।
वीडियो देखते ही वनमंत्री केदार कश्यप ने जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। नतीजा यह रहा कि मात्र 24 घंटे के भीतर मासूम प्रवीण को व्हीलचेयर और ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी गई।
व्हीलचेयर और ट्राइसाइकिल मिलने के बाद प्रवीण की आंखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान देखने लायक थी। वहीं इस संवेदनशील पहल के लिए मासूम के परिजनों में नयी उम्मीद और खुशी की लहर दौड़ गयी, जहां सभी ने मंत्री केदार कश्यप का आभार जताया।
कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कहा सरकार का कर्तव्य है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुंचे। किसी मासूम की पीड़ा को अनदेखा नहीं किया जा सकता। प्रवीण जैसे बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना साय सरकार की जिम्मेदारी है और उसकी हर संभव सहायता के लिए हम सदैव तत्पर रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि सोनपुर गांव नक्सल प्रभावित क्षेत्र में आता है, जहां कभी लोग जाने से डरते थे। आज वही क्षेत्र विकास की नई कहानी लिख रहा है। सड़क, बिजली, नेटवर्क और मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ अब मानवीय संवेदनाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।
यह पूरी घटना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक मासूम के सपनों को सच करने की कहानी है – जो साबित करती है कि संवेदनशील सरकार और जागरूक समाज मिलकर चमत्कार कर सकते हैं।




