जगदलपुर

अनुष्ठान: श्रीमद देवी भागवत महापुराण के पांचवें दिन निकाली है मां कुष्मांडा की पालकी,लक्ष्मी हैं बस्तर की मातृशक्तियाँ : भारद्वाज

अनुष्ठान में हुआ दंतेश्वरी चालीसा के रचयिता और गायक का हुआ सम्मान

➡️सनातन भाव से दो बच्चों ने यज्ञशाला में मनाया अपना जन्मदिन

जगदलपुर = मां दंतेश्वरी मंदिर में चल रहे श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के पांचवें दिन रविवार को मां कुष्मांडा के साथ ही भगवान कृष्ण जन्म और योगमाया प्राकट्य की कथा सुनाई गई। कथा सुनाते हुए बनारस से पधारे आचार्य सुमित भारद्वाज ने कहा कि बस्तर की आराध्य मां दंतेश्वरी है। यहां गांव-गांव में मातागुड़ी है। बस्तर के मातृशक्ति लक्ष्मी है। यह बात की पुष्टि इस बात से हो जाती है कि बस्तर का अर्थतंत्र आज भी पूरी तरह वनोपज संग्रह करने और बाजार हाट करने वाली महिलाओं पर निर्भर है। मां दाता है,चाहे वह जन्म दे या समृद्धि।

मां दंतेश्वरी मंदिर की यज्ञशाला में चल रहे श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा के दौरान भगवान कृष्ण जन्म की कथा सुनते हुए योगमाया प्रादुर्भाव के संदर्भ में आचार्य ने कहा कि भारतवासी हर वस्तु में देवी शक्ति की अनुभूति करते हैं। उन्होंने बताया कि योगमाया जिनका दूसरा नाम विंध्यवासिनी है। इन्हें छत्तीसगढ़ वासी बिलई माता के नाम से हजारों साल से पूजते आ रहे हैं। योगमाया ने गोकुल में जन्म लिया था। यह संयोग ही है कि धमतरी के जिस स्थान पर बिलई माता अर्थात विंध्यवासिनी का मंदिर है। वह स्थान भी गोकुलपुर कहलाता है।

➡️मनाया गया योगमाया प्राकट्य उत्सव

देवी भागवत महापुराण के दौरान पांचवें दिन मां कुष्मांडा की झांकी प्रस्तुत की गई, वहीं मां कुष्मांडा को पालकी में बिठाकर नगर भ्रमण कराया गया। इसके पहले योगमाया और कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। इस मौके पर नगर के दो बच्चों ने सनातन पद्धति से अपना जन्मोत्सव मनाया। सैकड़ो लोगों ने इन बच्चों को अपना आशीष दिया।

➡️रचनाकार और गायक का हुआ सम्मान

बताते चलें कि श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा के दौरान प्रतिदिन की भांति मां दंतेश्वरी चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया। इस मौके पर मां दंतेश्वरी चालीसा के रचनाकार सत्यनारायण मिश्रा और चालीसा को स्वरबद्ध करने वाले गायक विजय पटनायक का शाल- श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया

➡️आज के अनुष्ठान

श्रीमद देवी भागवत महापुराण के छठवें दिन सोमवार को

स्कंधमाता महात्म, सूर्यवंशी राजाओं की कथा, सुकन्या कथा, हरिश्चंद्र की कथा, मां शाकंभरी कथा सुनाई जाएगी। वहीं दंतेश्वरी चालीसा के बाद मां कुष्मांडा की पालकी निकाली जाएगी।

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