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नवा तरिया’ से आत्मनिर्भरता की नई लहर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर से किया अभियान का आगाज़

जगदलपुर =17 अप्रैल छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने और जल संरक्षण के साथ-साथ आजीविका के नए अवसर पैदा करने के लिए राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने जशपुर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में ‘नवा तरिया’ और ‘मोर गांव मोर पानी’ महाभियान का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा की उपस्थिति ने इस पहल के महत्व को और रेखांकित किया, जो न केवल जल संचयन बल्कि राज्य की ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाला है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के साथ ही पूरे प्रदेश में जल प्रबंधन को लेकर एक नई ऊर्जा देखी जा रही है, जिसका सीधा असर बस्तर जिले में भी महसूस किया गया जहाँ प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्काल 9 नए तालाबों की स्वीकृति के साथ ही निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया है।

यह पूरी योजना महात्मा गांधी नरेगा और ‘युक्तधारा पोर्टल’ के तकनीकी तालमेल पर आधारित है, जिसके माध्यम से प्रदेश की प्रत्येक संकुल स्तर संगठनों के लिए कम से कम एक नए तालाब की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। वर्तमान में चल रहे मनरेगा के ‘पीक सीजन’ का लाभ उठाते हुए सरकार का लक्ष्य मई 2026 तक ‘अमृत सरोवर’ की तर्ज पर इन तालाबों का निर्माण पूर्ण करना है। इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल पुराने तालाबों के गहरीकरण पर ध्यान न देकर, वैज्ञानिक पद्धति से नए उपयुक्त स्थलों का चयन कर उच्च गुणवत्ता वाले ‘सामुदायिक जल संचयन तालाबों’ का निर्माण किया जा रहा है। इन तालाबों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इनमें प्रतिवर्ष पर्याप्त जल संचय संभव हो सके, जिससे गिरते भू-जल स्तर को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह ‘तालाब मॉडल’ विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं और भूमिहीन परिवारों के लिए वरदान साबित होने जा रहा है। बस्तर जिला पंचायत के सीईओ प्रतीक जैन और मनरेगा शाखा के मार्गदर्शन में इस पहल को सीधे तौर पर महिला स्व-सहायता समूहों की आय से जोड़ दिया गया है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद इन तालाबों को महिला समूहों की संकुल स्तर संगठनों को हस्तांतरित कर दिया जाएगा, जहाँ वे मछलीपालन, सब्जी उत्पादन और पशुपालन जैसी बहुआयामी गतिविधियों के माध्यम से अपनी स्थायी आजीविका सुनिश्चित कर सकेंगी। उदाहरण के तौर पर बस्तर के बकावंड ब्लॉक में प्रथम चरण के लिए दो समूहों का चयन भी हो चुका है। नवा तरिया पहल में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इन कार्यों के हर चरण में स्थानीय समुदाय और पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे यह अभियान वास्तव में एक जन अभियान का रूप ले चुका है।

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