
रायपुर =छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचाने वाली प्रतिभाशाली पंडवानी गायिका और रेलवे विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत श्रीमती तरुणा साहू आज एक प्रेरणादायक शख्सियत बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि मन में जुनून और लगन हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
श्रीमती तरुणा साहू ने मात्र 9 वर्ष की छोटी उम्र से ही पंडवानी गायन की शुरुआत कर दी थी। गांव के छोटे-छोटे मंचों से अपनी कला का सफर शुरू करने वाली तरुणा आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं। उनकी आवाज में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू और लोक परंपरा की गहराई झलकती है, जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है।
तरुणा साहू अपनी सफलता का श्रेय अपनी गुरु और मां समान पंडवानी की महान गायिका तीजन बाई को देती हैं। वे उन्हें न केवल अपनी प्रेरणा मानती हैं, बल्कि उनके आदर्शों पर चलकर ही अपनी कला को निखारने का प्रयास करती हैं। गुरु के प्रति उनका सम्मान और समर्पण इस बात से भी झलकता है कि वे हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ी रहती हैं। हाल के कठिन समय में भी उन्होंने अपनी गुरु का साथ देकर सच्चे शिष्य होने का परिचय दिया है।
उनकी कला और समर्पण को देखते हुए प्रदेश सरकार सहित कई सामाजिक संगठनों ने उन्हें सम्मानित किया है। इतना ही नहीं, उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी प्रतिभा के लिए सराहा गया है। हाल ही में उन्हें प्रसिद्ध अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के हाथों ‘नारी शक्ति सम्मान’ से नवाजा गया, जो उनके लिए गर्व का क्षण रहा।
कला के साथ-साथ अपने पेशेवर जीवन में भी तरुणा साहू पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ कार्य कर रही हैं। वे केंद्र सरकार के रेलवे विभाग RPF में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी लगन से करती हैं। नौकरी और कला के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन तरुणा ने इसे बखूबी निभाकर दूसरों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
उनके पारिवारिक जीवन की बात करें तो उनके पति एमन साहू भी राज्य सरकार के पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। दोनों के बीच आपसी समझ, विश्वास और सहयोग का रिश्ता बेहद मजबूत है। एमन साहू हर कदम पर अपनी पत्नी का साथ देते हैं और उनकी कला यात्रा में भी पूर्ण सहयोग करते हैं। यही कारण है कि तरुणा साहू अपने जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने में सफल रही हैं।
श्रीमती तरुणा साहू आज उन सभी युवाओं और विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि कठिन परिश्रम, समर्पण और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान बना सकता है।
उनकी यह सफलता न केवल उनके परिवार या समाज के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। तरुणा साहू का यह सफर आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि अपनी संस्कृति और कला को संजोते हुए भी आधुनिक जीवन में ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है।




