हजारों किमी का सफर पूरा: ‘आओ छत्तीसगढ़, देखो बस्तर’ मिशन का जगदलपुर में भव्य समापन
नक्सल से पर्यटन तक: बाइकर्स ने देशभर में पहुंचाया 'नया बस्तर'

➡️’आओ छत्तीसगढ़, देखो बस्तर’ मिशन का ऐतिहासिक सफर पूरा, सोमवार को जगदलपुर में होगा भव्य समापन
जगदलपुर। बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और पर्यटन स्थलों को देशभर के बाइकर्स तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई आओ छत्तीसगढ़, देखो बस्तर मिशन यात्रा का समापन सोमवार को जगदलपुर में होगा। पांच राइडर्स—चंदन दास, समीर मनीष अय्यर, भगत सिंह बघेल और विवेक पेगड़ चार मोटरसाइकिलों पर हजारों किलोमीटर की रोमांचक यात्रा पूरी कर अपने गृह नगर लौटेंगे। यात्रा का समापन मां दंतेश्वरी मंदिर, जगदलपुर के समक्ष होगा।
यह विशेष अभियान 20 जून को जगदलपुर से मां दंतेश्वरी का आशीर्वाद लेकर शुरू हुआ था। यात्रा का उद्देश्य केवल बाइक राइड करना नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में पहुंचकर लोगों को बस्तर आने का निमंत्रण देना और उन्हें यहां के पर्यटन, संस्कृति तथा बदलते सकारात्मक माहौल से परिचित कराना था।
यात्रा के दौरान दल सबसे पहले भिलाई पहुंचा, जहां 100 से अधिक बाइकर्स से मुलाकात कर उन्हें बस्तर भ्रमण का निमंत्रण दिया गया। इसके बाद टीम सागर, झांसी, ग्वालियर और जीरकपुर (चंडीगढ़) पहुंची। प्रत्येक शहर में अलग-अलग राइडर समूहों से मुलाकात कर बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों, गुफाओं, घने जंगलों और जनजातीय संस्कृति की जानकारी ली गई। कई बाइकर्स ने पहली बार किसी बस्तरवासी को इस तरह पर्यटन आमंत्रण अभियान चलाते देखा और इसे एक अनूठी पहल बताया।
इसके बाद दल मनाली, अटल टनल, जांस्कर वैली, गोनबो रंजन, पदुम, लेह, खारदुंगला, नुब्रा वैली, पैंगोंग लेक, उमलिंगला और डेमचोक (भारत-चीन सीमा) तक पहुंचा। इन सभी स्थानों पर देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे हजारों बाइकर्स और पर्यटकों से संपर्क कर उन्हें आओ छत्तीसगढ़, देखो बस्तर का संदेश दिया गया।
खारदुंगला, जिसे दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा मोटरेबल रोड माना जाता है, तथा लगभग 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित उमलिंगला, जो विश्व का सबसे ऊंचा मोटरेबल रोड है, वहां भी टीम ने देशभर से आए बाइकर्स को बस्तर के पर्यटन स्थलों, चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, गुफाओं, वन संपदा और जनजातीय संस्कृति की विस्तृत जानकारी दी।
टीम ने पैंगोंग लेक में दो दिनों तक प्रवास किया, जहां बड़ी संख्या में देशभर से पहुंचे बाइकर्स और पर्यटकों से संवाद कर उन्हें बस्तर भ्रमण के लिए प्रेरित किया। दल का कहना है कि हर वर्ष लद्दाख में देश-विदेश से हजारों पर्यटक और बाइकर्स पहुंचते हैं, इसलिए इस क्षेत्र को अभियान के लिए चुना गया, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक बस्तर का संदेश पहुंचाया जा सके।
यात्रा के दौरान टीम कारगिल, श्रीनगर और अमृतसर भी पहुंची। कारगिल में देशभर के बाइकर्स से संवाद किया गया, श्रीनगर में पर्यटन प्रेमियों से मुलाकात की गई तथा अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में बस्तर की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए वहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी छत्तीसगढ़ एवं बस्तर आने का निमंत्रण दिया गया।
राइडर्स का कहना है कि कभी नक्सलवाद की वजह से बस्तर की पहचान सीमित होकर रह गई थी, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। नक्सल प्रभाव कम होने के साथ बस्तर पर्यटन की नई पहचान बन रहा है। इसी सकारात्मक बदलाव का संदेश देशभर तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह अनूठा अभियान शुरू किया गया।
सोमवार, 13 जुलाई को जगदलपुर पहुंचने पर पांचों राइडर्स का स्वागत किया जाएगा तथा मां दंतेश्वरी मंदिर के समक्ष इस ऐतिहासिक यात्रा का विधिवत समापन होगा। अभियान से जुड़े राइडर्स का विश्वास है कि उनका यह प्रयास देशभर के पर्यटकों को बस्तर की ओर आकर्षित करेगा और क्षेत्र के पर्यटन को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



