360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज अपनी 619 वर्षों से चली आ रही समृद्ध रियासतकालीन परंपरा का निर्वहन करते हुए प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 29 जून 2026 (देव स्नान पूर्णिमा) से 25 जुलाई 2026 (देवशयनी एकादशी) तक बस्तर गोंचा महापर्व 2026 का आयोजन होगा

#बस्तर गोंचा महापर्व 2026
जगदलपुर =29 जून 2026 को देव स्नान पूर्णिमा (चंदन यात्रा) के साथ महापर्व का शुभारंभ हो चुका है। इस वर्ष श्रद्धालुओं को भगवान के दिव्य स्नान का प्रत्यक्ष दर्शन कराने के उद्देश्य से मंदिर परिसर में स्थापित शेड पर भगवान श्री जगन्नाथ, माता सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महाभिषेक सम्पन्न कराया गया, जिसका हजारों श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ प्राप्त किया।
भगवान श्री जगन्नाथ के अनसर काल की समाप्ति के उपरांत 15 जुलाई 2026 को परंपरानुसार नेत्रोत्सव का आयोजन होगा। भगवान श्री जगन्नाथ का नेत्रोत्सव वैदिक पूजा-विधान के साथ संपन्न होगा। देव स्नान पूर्णिमा के पश्चात अनवसर (विश्राम) अवधि पूर्ण होने पर भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। नेत्रोत्सव के अवसर पर आकर्षक वस्त्र, स्वर्ण-रजत आभूषणों एवं दिव्य अलंकरणों से सुसज्जित कर भक्तों को प्रथम दर्शन कराए जाएंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के नवयौवन एवं दिव्य स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।
इसके पश्चात 16 जुलाई 2026 को पारंपरिक बस्तरिया तुपकी की गर्जना के बीच श्रीगोंचा रथयात्रा प्रारंभ होगी। भगवान श्री जगन्नाथ, माता सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी सहित 22 विग्रहों को तीन भव्य रथों पर विराजमान कर नगर परिक्रमा के उपरांत जनकपुरी (गुंडिचा मंडप) ले जाया जाएगा, जहाँ नौ दिनों तक श्रद्धालु दर्शन लाभ प्राप्त करेंगे।
रथयात्रा के शुभारंभ पर समाज एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा पारंपरिक तुपकी सलामी दी जाएगी। इस वर्ष गोंचा महापर्व के प्रथम दिवस (श्री गोंचा) को स्थानीय अवकाश घोषित किए जाने पर समाज जिला प्रशासन एवं कलेक्टर बस्तर के प्रति आभार व्यक्त करता है।
16 जुलाई से 24 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। प्रतिदिन संध्या 7:30 बजे महाआरती के पश्चात भजन-कीर्तन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ होंगी, जिनमें स्थानीय कलाकारों के साथ संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से राष्ट्रीय स्तर के कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे।
महापर्व के प्रमुख कार्यक्रम इस प्रकार हैं— 19 जुलाई –अखण्ड रामायण पाठ। 20 जुलाई (हेरा पंचमी) – समाज के वरिष्ठजनों एवं पारंपरिक तुपकी निर्माताओं का सम्मान तथा संध्या बेला में लक्ष्मीजी की डोली का नगर भ्रमण एवं लक्ष्मी-नारायण संवाद। 21 जुलाई – भगवान श्री जगन्नाथ को छप्पन भोग अर्पण। 23 जुलाई – समाज द्वारा निःशुल्क उपनयन संस्कार। 24 जुलाई – बाहुड़ा गोंचा रथ यात्रा, भगवान की श्रीमंदिर वापसी एवं कपाट फेंड़ा पूजा। 25 जुलाई – देवशयनी एकादशी के साथ गोंचा महापर्व का परायण।
गोंचा महापर्व को मेला स्वरूप प्रदान करने हेतु इस वर्ष भी 12 धार्मिक दुकानों की स्थापना की जा रही है, जहाँ पूजा सामग्री एवं भगवान श्री जगन्नाथ के प्रिय भोग-प्रसाद उपलब्ध रहेंगे।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को समाज के प्रतिनिधिमंडल ने 11 जुलाई को महापर्व में सम्मिलित होने का आमंत्रण दिया है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा मानसून सत्र की समाप्ति के बाद कार्यक्रम में शामिल होने का आश्वासन दिया है। प्रदेश के अन्य जनप्रतिनिधियों के भी महापर्व में सम्मिलित होने की संभावना है।
इस वर्ष तेरह वेश झांकी स्थल को 10 वर्षों बाद नवीन वस्त्रों एवं आकर्षक विद्युत सज्जा के साथ पुनः तैयार किया गया है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
नगरपालिका निगम, जगदलपुर के सहयोग से प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी गोंचा गुड़ी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिक भी बैठकर महापर्व का आनंद ले सकेंगे। नगर निगम द्वारा शुद्ध पेयजल एवं स्वच्छता की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज की 14 क्षेत्रीय समितियों के अंतर्गत 108 से अधिक ग्रामों में निवासरत समाज के परिवार 17 जुलाई से 23 जुलाई तक भगवान श्री जगन्नाथ को पारंपरिक अमनिया (सात्विक भोग) अर्पित कर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण करेंगे।
बड़ेगुड़ी के भोगसार का निर्माण पूर्ण हो चुका है तथा गोंचा उपरांत प्रतिदिन भोग-प्रसाद वितरण प्रारंभ करने की योजना है। नवीन रथ निर्माण कार्य अंतिम चरण में है तथा इस वर्ष भी विद्युत सज्जा के साथ भव्य रथ संचालन किया जाएगा। रथ परिक्रमा मार्ग पर विद्युत अवरोध समाप्त करने हेतु मा. मुख्यमंत्री मा. वन मंत्री एवं जगदलपुर विधायक के प्रयासों के लिए समाज आभार व्यक्त करता है।
रथ परिक्रमा के दौरान ओडिशा एवं बस्तर के कलाकारों द्वारा आकर्षक नृत्य-संगीत की प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। विभिन्न समाज एवं संगठनों द्वारा भगवान श्री जगन्नाथ, माता सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी के स्वागत एवं पूजन की व्यवस्था की जा रही है, जिसका समाज स्वागत करता है।
बस्तर का गोंचा महापर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, लोकसंस्कृति एवं जनभागीदारी का महापर्व है, जिसमें ग्रामीणों से लेकर विभिन्न समुदायों के लोग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से अपनी सहभागिता निभाते हैं।
360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज बस्तर अंचल सहित देश-विदेश के सभी श्रद्धालुओं एवं नागरिकों को भगवान श्री जगन्नाथ के दर्शन लाभ हेतु सादर आमंत्रित करता है।
महापर्व के सफल आयोजन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी सहयोग प्रदान करने वाले सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं वेब मीडिया के पत्रकार बंधुओं के प्रति समाज हार्दिक आभार एवं साधुवाद व्यक्त करता है।
पत्रकार वार्ता के दौरान समाज के अध्यक्ष वेदप्रकाश पांडे, बस्तर गोंचा आयोजन समिति के अध्यक्ष मुक्तेश्वर पांडे, पूर्व अध्यक्ष ईश्वर नाथ खम्बारी, हेमंत पांडे, दिनेश पाणिग्राही, रविन्द्र पांडे, बनमाली पाणिग्राही, राकेश पांडे, सुदर्शन पाणिग्राही, गजेंद्र पाणिग्राही, विम्भाधर पांडे, नरेंद्र पाणिग्राही, विवेक पांडे, वैभव पांडे, आत्माराम जोशी, पुरुषोत्तम जोशी, मिनेश पाणिग्राही, मोहन जोशी, शुभांशु पाढ़ी, जशकेतन जोशी, आशु आचार्य, प्रदीप पाढ़ी, विपिन पाणिग्राही, हर्ष पाणिग्राही, रजत पाणिग्राही, सोमप्रकाश जोशी, शिवांश पाणिग्राही उपस्थित थे।



