दो नदियां पार कर ग्रामीणों के बीच पहुंचे कलेक्टर कलेक्टर और सीईओ ने छाते के नीचे सुनीं जनता की समस्याएं
फाइलों से बाहर, जनता के द्वार, 3 दिन में बिजली और 45 दिन में पट्टे का वादा

➡️ग्रामीणों से खुद फोन लगवाकर परखी ‘108’ एंबुलेंस की मुस्तैदी
सुकमा = प्रशासन जब बंद कमरों और फाइलों से बाहर निकलकर सीधे जनता के द्वार तक पहुंचता है, तो लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत तस्वीर सामने आती है। सुकमा जिले में विकास की एक नई इबारत लिखते हुए कलेक्टर अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ मुकुन्द ठाकुर ने शुक्रवार को सुदूर वनांचल के गांव गुमोड़ी, कोंडासावली और तारलागुड़ा का सघन फील्ड निरीक्षण किया। दो-दो नदियों को पार कर जब जिले के ये शीर्ष अधिकारी ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बनता था। कलेक्टर ने बिना किसी तामझाम के, बिल्कुल सादगी से ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर जनचौपाल लगाई। अफसरों को अपने इतने करीब और जमीन पर बैठा देख ग्रामीण खुशी और उमंग से भर गए।

निरीक्षण दौरा के पहले पड़ाव में अधिकारी इमली के पेड़ की घनी छांव तले गुमोड़ी पंचायत पहुंचे। कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए महतारी वंदन, तेंदुपत्ता भुगतान और बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य का हाल जाना। जब ग्रामीणों ने बताया कि उनके जमीन के कागजात गुम हो चुके हैं, तो कलेक्टर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत ही गांव में विशेष राजस्व शिविर लगाकर नए दस्तावेज तैयार करने के निर्देश दिए। बुनियादी जरूरतों को समझते हुए उन्होंने गांव में जल्द बिजली पहुंचाने, सड़क और पुलिया निर्माण का भरोसा दिया। इसके बाद प्राथमिक शाला पहुंचे कलेक्टर का बच्चों से आत्मीय लगाव भी दिखा; जब बच्चों ने उन्हें गिनती और एबीसीडी पढ़कर सुनाई, तो उन्होंने खुश होकर स्कूल परिसर में पेवर ब्लॉक, बाउंड्रीवाल और नए रसोईघर के निर्माण को तत्काल मंजूरी दे दी।
सफर आगे बढ़ा और अधिकारी कोंडासावली गांव पहुंचे, जहां एक आम के पेड़ के नीचे ग्रामीणों की पंचायत लगी थी। संवाद के बीच ही अचानक तेज बारिश शुरू हो गई, लेकिन न तो प्रशासन के कदम डिगे और न ही ग्रामीणों का हौसला कम हुआ। कलेक्टर ने हाथ में छाता थामा और झमाझम बारिश के बीच ग्रामीणों के दुख-दर्द सुनते रहे। बिजली विभाग के कनेक्शन संबंधी शिकायत पर उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को 3 दिन के भीतर व्यवस्था दुरुस्त करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया। इस चौपाल का सबसे बड़ा तोहफा वनाधिकार पट्टों के रूप में मिला; कलेक्टर ने कहा कि डेढ़ महीने के भीतर शिविर लगाकर सभी पात्र ग्रामीणों को नवीन वनाधिकार पट्टा सौंप दिया जाएगा।
उपस्वास्थ्य केंद्र कोंडासावली के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों की मांग को पूरा करते हुए तुरंत एक एंबुलेंस वाहन स्वीकृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र को सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिए खिड़की-दरवाजों में पर्दे लगाने, मुख्य मार्ग से केंद्र तक पेवर ब्लॉक रैंप, योगा शेड और सोकपीट गड्ढा बनाने के काम को हरी झंडी दी। प्रशासन का यह कदम साफ तौर पर यह दर्शाता है कि अंदरूनी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
इस संवेदनशील दौरे का सबसे भावुक और जमीनी पल तारलागुड़ा में नवनिर्मित हो रहे सुशासन परिसर के निरीक्षण के दौरान आया। कलेक्टर ने वहां मौजूद ग्रामीणों से आत्मीयता से बात करते हुए अचानक पूछ लिया कि अगर आपातकाल में एंबुलेंस बुलानी हो, तो आप लोग क्या करोगे। एंबुलेंस का नंबर क्या है?” जागरूकता परखने के लिए उन्होंने खुद एक ग्रामीण से ‘108’ पर कॉल करवाया। जब दूसरी तरफ से एड्रेस पूछने के बाद तुरंत जवाब मिला कि गाड़ी जल्द आ जाएगी, तो ग्रामीणों के चेहरे पर सुरक्षा का एक भाव तैर गया। इसी दौरान जब पीएम आवास के दो हितग्राहियों ने खाते में राशि न आने की व्यथा सुनाई, तो कलेक्टर ने तुरंत जांच करवाई। बैंक खाते में होल्ड होने की तकनीकी खामी सामने आते ही उन्होंने सचिव को तत्काल होल्ड हटवाने का निर्देश देकर गरीबों के आशियाने की राह आसान कर दी।
दौरे के समापन तक आसमान से पानी बरसता रहा, लेकिन छाते की आड़ में अपनी बात रखते ग्रामीणों और उसे पूरी गंभीरता से डायरी में नोट करते अधिकारियों की जुगलबंदी ने यह साबित कर दिया कि सुकमा में अब सुशासन की जड़ें बहुत गहरी हो चुकी हैं। कलेक्टर अमित कुमार ने ग्रामीणों से वादा किया कि जैसे ही सुशासन परिसर का भवन पूरी तरह तैयार हो जाएगा, वे दोबारा उनके बीच खुशियां बांटने और व्यवस्थाओं का जायजा लेने जरूर आएंगे। जिला प्रशासन के इस मानवीय और त्वरित फैसले लेने वाले अंदाज ने आज सुकमा के नक्सल प्रभावित रहे आदिवासी अंचलों में विश्वास का एक नया सूरज उगा दिया है।



