अधिवक्ता परिषद छत्तीसगढ़ प्रांत के दो दिवसीय अभ्यास वर्ग का प्रथम दिवस गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में सम्पन्न

जगदलपुर =अधिवक्ता परिषद छत्तीसगढ़ प्रांत के दो दिवसीय अभ्यास वर्ग का शुभारंभ आज सायं 3:00 बजे पंजीयन के साथ हुआ। प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं इकाइयों से पधारे अधिवक्ताओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने पूरे परिसर को संगठनात्मक ऊर्जा एवं आत्मीयता से भर दिया। अभ्यास वर्ग के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ सायं 5:15 बजे माँ भारती एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर मंचासीन माननीय अतिथियों एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष ऊँचाई प्रदान की।
उद्घाटन सत्र में माननीय क्षेत्र संयोजक श्री प्रदीप सिंह जी एवं माननीय राष्ट्रीय मंत्री, अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद, श्री विक्रम दुबे जी का प्रेरणादायी उद्बोधन प्राप्त हुआ। दोनों वक्ताओं ने अधिवक्ता परिषद के संगठनात्मक दायित्व, अधिवक्ताओं की सामाजिक भूमिका तथा न्याय के क्षेत्र में राष्ट्रहित एवं समाजहित के प्रति अधिवक्ताओं की जिम्मेदारियों पर सारगर्भित मार्गदर्शन प्रदान किया। तत्पश्चात माननीय राष्ट्रीय महामंत्री, अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद, श्री भरत कुमार जी ने अभ्यास वर्ग के मूल उद्देश्य एवं उसकी आवश्यकता पर अत्यंत प्रभावी एवं मार्गदर्शक उद्बोधन दिया। उन्होंने अधिवक्ता को केवल न्यायालयीन दायित्वों तक सीमित न मानते हुए न्याय, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी प्रहरी के रूप में अपनी भूमिका को समझने का आह्वान किया।
उद्घाटन सत्र के पश्चात प्रथम सत्र में माननीय राष्ट्रीय मंत्री, अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद, श्री विक्रम दुबे जी ने अधिवक्ता परिषद के उद्देश्य एवं आगामी दृष्टि पर आयामानुसार विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने परिषद को न्याय, समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित अधिवक्ताओं का सशक्त मंच बताते हुए संगठन के मूल उद्देश्यों, कार्यपद्धति तथा भविष्य की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने अधिवक्ताओं से आह्वान किया कि वे विधिक क्षेत्र में उत्कृष्टता के साथ-साथ समाज के वंचित एवं पीड़ित वर्गों को न्याय सुलभ कराने, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए परिषद की आगामी दिशा को सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
प्रथम सत्र के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मध्य बस्तर राजपरिवार के महाराजा श्री कमलचंद्र भंजदेव जी का गरिमामय आगमन हुआ। अधिवक्ता परिषद की ओर से उनका आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। महाराजा श्री कमलचंद्र भंजदेव जी ने अपने संबोधन में बस्तर के गौरवशाली राजपरिवार, उसकी ऐतिहासिक परंपराओं तथा बस्तर की न्याय-व्यवस्था पर अत्यंत रोचक, तथ्यपूर्ण एवं सारगर्भित प्रकाश डाला। उनके वक्तव्य में बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोकजीवन और प्राचीन न्याय परंपराओं का ऐसा जीवंत चित्र उभरकर सामने आया, जिसने उपस्थित अधिवक्ताओं को इतिहास, समाज और न्याय के पारस्परिक संबंधों को एक नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान किया। 
प्रथम दिवस का यह आयोजन ज्ञान, संगठन, संस्कार और संस्कृति के सुंदर समन्वय का साक्षी बना। अभ्यास वर्ग का उद्देश्य केवल विधिक ज्ञान का संवर्धन नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं में न्याय के प्रति प्रतिबद्धता, सामाजिक उत्तरदायित्व, संगठनात्मक चेतना और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण को और अधिक सुदृढ़ करना है।




